
मासूम रागिनी के कदमों को दें उड़ान — आइए मिलकर इसे अपने पैरों पर खड़ा करें! 🌸👣
यह नन्हीं सी बच्ची भी बाकी बच्चों की तरह दौड़ना, खेलना और मुस्कुराते हुए स्कूल जाना चाहती है। लेकिन जब यह महज 6 महीने की थी, तभी एक दर्दनाक सड़क हादसे में इसका पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। पैसों के अभाव और आर्थिक तंगी के कारण परिवार समय पर इसका सही इलाज नहीं करा सका।
लेकिन पैर की यह कमी रागिनी के बुलंद हौसलों को नहीं तोड़ पाई! यह नन्हीं बच्ची रोजाना एक पैर के सहारे 400 मीटर का सफर तय करके स्कूल जाती है। इतनी सी उम्र में अपने सपनों को पूरा करने की इसकी जिद्द हर किसी को प्रेरणा देती है।
अब वक्त है कि हम सब मिलकर इस मासूम की हिम्मत बनें। सही इलाज और कस्टमाइज्ड कृत्रिम पैर (Artificial Leg) की मदद से रागिनी फिर से दोनों पैरों पर दौड़ सकती है। जरूरत है बस आपके एक छोटे से सहयोग की!
"आपका एक छोटा सा योगदान, रागिनी की पूरी दुनिया बदल सकता है।"